गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

मैं तो जनम -जली






दुःखों की साईत  शायद बहुत भारी है 
यह संजोग बली 
मैं  तो जनम -जली
 
बिरहा के द्वार पर बधाई बजी है 
देने शगुन चली 
मैं  तो जनम -जली 

मेरे तन के फूल में मन की सुगंधी 
उड़ी, कहाँ चली 
मैं  तो जनम -जली 

शायद तेरे इश्क़ ने भेस बदला है 
मेरी उम्र छली 
मैं  तो जनम -जली 

तेरे लिए मैंने दुनिया छान ली 
तेरी कौन गली 
मैं  तो जनम -जली 

होंठो के बागों में सिर्फ ठण्डी  साँसे हैं 
उसमे चम्पा की कली 
मैं  तो जनम -जली 

आँखों की टहनी पर आँसू  पक गए हैं 
चख लो दर्द फली 
मैं  तो जनम -जली
 
अमृता  प्रीतम 


18 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन संसद पर हमला, हम और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  2. हर मौके पर अपने भाग्य को कोसती .......एक भिन्न सोच
    नई पोस्ट भाव -मछलियाँ
    new post हाइगा -जानवर

    उत्तर देंहटाएं
  3. eik sach h zindagi kaa... jaane kis ke khaate m pad jaaye ye kisi o nhi pta h...

    उत्तर देंहटाएं
  4. जनम जली का संजोग बली !
    अच्छा लगा अमृता को पढ़ना !

    उत्तर देंहटाएं
  5. मन की चुभन, व्यक्त इन शब्दों में

    उत्तर देंहटाएं

शुक्रिया, साथ बना रहे …।