सोमवार, 30 दिसंबर 2013

​एक ब्राहम्ण ने कहा है कि ये साल अच्छा है .....





भूख के मारे कोई बच्चा नहीं रोयेगा
चैन की नींद हर एक शख्स  यहाँ सोयेगा 

आंधी नफ़रत की चलेगी न कहीं अब के बरस 
प्यार की फसल उगाएगी ज़मीं  अब के बरस

है यक़ीं अब न कहीं शोर शराबा होगा 
ज़ुल्म होगा न कहीं खून खराबा होगा 

औस और धूप के सदमे न सहेगा कोई 
अब मेरे देस में बेघर न रहेगा कोई

नए वादों का जो डाला है, वो जाल अच्छा है 
रहनुमाओं ने कहा है कि ये साल अच्छा है

हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन 
दिल के खुश रखने  को ग़ालिब  ये ख्याल अच्छा है ​



​-मक़बूल ग़ालिब 

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

जंगल की बेटी

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हरसिंगार की महक के जैसी, हर दिल पर छा जायेगी 
रुत की एक सहेली है वह, रुत संग ही खो जायेगी 

​​भौर किरन के साथ निकल कर बगिया बगिया घूमेगी 
शाम ढले सूरज के संग ही बादल में सो जायेगी 

लहरों लहरो टूट के  साहिल के सीने पर बिखरेगी 
बादल बादल रक़्स करेगी, चिड़ियों के संग गायेगी 

अम्बर के कच्चे रंगों पर पंछी बन कर डोलेगी 
घास के ताज़ा फूलों में फिर चटखेगी मुस्कायेगी 

कोहरे के आँचल में लिपटे हलके गीले बाल लिए 
धान के जैसी बाली  उमर में गीत खुशी के गायेगी 

चाँद किरन के झूले में वह तारों से बतियाएगी
सुबह सवेरे शबनम बन कर , हर गुंचा धो जायेगी 

तेरे सुनहरे क़ैद में कैसे, ये अल्हड़ जी पायेगी 
मालो -ज़र के ढेर में दब कर ये पगली खो जायेगी 

जंगल की वहशत फिर उसमे मार रही है लश्कारे 
जंगल की बेटी वापस फिर जंगल की हो जायेगी 

                                                       - सेहबा जाफ़री 

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

मैं तो जनम -जली






दुःखों की साईत  शायद बहुत भारी है 
यह संजोग बली 
मैं  तो जनम -जली
 
बिरहा के द्वार पर बधाई बजी है 
देने शगुन चली 
मैं  तो जनम -जली 

मेरे तन के फूल में मन की सुगंधी 
उड़ी, कहाँ चली 
मैं  तो जनम -जली 

शायद तेरे इश्क़ ने भेस बदला है 
मेरी उम्र छली 
मैं  तो जनम -जली 

तेरे लिए मैंने दुनिया छान ली 
तेरी कौन गली 
मैं  तो जनम -जली 

होंठो के बागों में सिर्फ ठण्डी  साँसे हैं 
उसमे चम्पा की कली 
मैं  तो जनम -जली 

आँखों की टहनी पर आँसू  पक गए हैं 
चख लो दर्द फली 
मैं  तो जनम -जली
 
अमृता  प्रीतम