सोमवार, 9 जुलाई 2012

तेरा मेरा नाम


तेरा मेरा नाम खबर में रहता था
दिन बीते एक सौदा सर में रहता था

मेरा रास्ता तकता था एक चाँद कहीं
मै सूरज के साथ सफ़र में रहता था.

सारे मंज़र गोरे गोरे लगते थे
जाने किसका रूप नज़र में रहता था

मैंने अक्सर आँखें मूंदे देखा है
एक मंज़र जो पस मंज़र  में रहता था

काठ की कश्ती पीठ थपकती रहती थी
दरियाओं का पाँव भंवर में रहता था

उजली  उजली तस्वीरें सी बनती हैं
सुनते हैं अल्लाह बशर में रहता था.

                                  -राहत इन्दौरी, कलामे ए राहत "नाराज़" से.

7 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा रास्ता तकता था एक चाँद कहीं
    मै सूरज के साथ सफ़र में रहता था ...

    ब्शुत ही लाजवाब शेर रहत साहब की उम्दा गज़ल का ... ऐसे चुनींदा शेर कम ही पढ़ने को मिलते हैं आज ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. राहत साहब बढ़िया हैं ! फोटोग्राफ चलती हुई गाड़ी से खींचा हुआ लगा रहा है शायद मोबाइल कैमरे से ? बहरहाल अच्छा है !

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह...
    बेहतरीन गज़ल...
    मेरा रास्ता तकता था एक चाँद कहीं
    मै सूरज के साथ सफ़र में रहता था.

    राहत साहब का कोई जवाब नहीं...

    अनु

    उत्तर देंहटाएं

शुक्रिया, साथ बना रहे …।