गुरुवार, 11 अक्तूबर 2012



यादों का एक झोंका आया, हमसे मिलने बरसों  बाद 
पहले इतना रोये नहीं  थे,  जितना रोये बरसों  बाद
 
लम्हा लम्हा घर उजड़ा  है , मुश्किल से अहसास हुआ 
पत्थर आये बरसों पहले, शीशे  टूटे  बरसों बाद       

1 टिप्पणी:

शुक्रिया, साथ बना रहे …।