रविवार, 30 अगस्त 2015

अमृता प्रीतम को जन्म दिवस की शुभ कामनाएं



एक मुलाकात

मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी 
सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने 
क्या ख्याल आया 
उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी 
मेरे हाथों में थमाई 
और हंस कर कुछ दूर हो गया

हैरान थी…. 
पर उसका चमत्कार ले लिया 
पता था कि इस प्रकार की घटना 
कभी सदियों में होती है…..

लाखों ख्याल आये 
माथे में झिलमिलाये

पर खड़ी रह गयी कि उसको उठा कर 
अब अपने शहर में कैसे जाऊंगी?

मेरे शहर की हर गली संकरी 
मेरे शहर की हर छत नीची 
मेरे शहर की हर दीवार चुगली

सोचा कि अगर तू कहीं मिले 
तो समुन्द्र की तरह 
इसे छाती पर रख कर 
हम दो किनारों की तरह हंस सकते थे

और नीची छतों 
और संकरी गलियों 
के शहर में बस सकते थे….

पर सारी दोपहर तुझे ढूंढते बीती 
और अपनी आग का मैंने 
आप ही घूंट पिया

मैं अकेला किनारा 
किनारे को गिरा दिया 
और जब दिन ढलने को था 
समुन्द्र का तूफान 
समुन्द्र को लौटा दिया….

अब रात घिरने लगी तो तूं मिला है 
तूं भी उदासचुपशान्त और अडोल 
मैं भी उदासचुपशान्त और अडोल 
सिर्फ- दूर बहते समुन्द्र में तूफान है…..

5 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है बड़ी प्यारी नज़्म बाँटी हैं आपने अमृता जी की इसे अपनी आवाज़ में रिकार्ड करने का जी हो आया है..

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    1. apki awaz aur Amrita ji ka andaz!! " nassha badhta hai, sharaben jo sharabon me mile" -Shukriya

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  2. बहुत खूब। बहुत ही शानदार रचना की प्रस्‍तुति।

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शुक्रिया, साथ बना रहे …।