शनिवार, 24 मई 2014

एक प्याली चाय




 



एक कसक 
एक खलिश 
कुछ मिला अनमिला 
कुछ गुमा अध गुमा 
कुछ अधूरे ख़्वाब 
कुछ नामुकम्मल ख्वाहिशें 
 सबकी टूटन 
और नए रास्तों पर चलने की हिम्मत 
कितना कुछ बाँट बूंट कर 
हल्का कर देती है
एक प्याली चाय 
अम्मा पास न हो तो 
दुलार भी देती है 
जीने का हौंसला भी दे जाती है 
और दे जाती है 
गर्म भाँप  में धुँआते से दिल को 
इतवार की  सुबह 
देर तक सोने के
 रंगीन सपने   
लोरी 

7 टिप्‍पणियां:

  1. behad sateek. kai dino se kehna chahta tha main bhi ye, shabd dhoka diye jaate the. aapne kar dikhaya. ravivar ki subah ban gayi aapki wajah se. Saadhuwaad!

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन इंडियन इंडिपेंडेस लीग के जनक : रासबिहारी बोस - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. सब कुछ बांट बूंट कर कितना हल्का कर देती है एक प्याली चाय। सुंदर, सबके मनकी बात।

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  4. हर दिन, और जीवन से जुड़ी सी चाय की प्याली .....

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  5. kitna kuch ham share karte the na ek pyali chai ke sath hmm sacchi kitna kuch ab kho gaya......

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शुक्रिया, साथ बना रहे …।