शनिवार, 4 जनवरी 2014

घर जाने का मौसम






 मोहब्बत जब लहू  बन कर
रगों में सरसराये तो 
कोई भूला हुआ चेहरा 
अचानक याद आये तो
क़दम मुश्किल से उठते हों 
इरादा डगमगाए तो 
कोई मद्धम से लहजे में 
तुम्हे वापिस बुलाये तो 
ठहर जाना, समझ लेना 
कि अब वापिस पलटने का 
अमल आग़ाज़ होता है

कभी तन्हाइयों का दर्द 
आँखों में समाये तो 
कोई लम्हा गुज़िश्ता चाहतों का 
जब सताये तो 
किसी की याद में रोना 
तुम्हे भी खूब आये तो 
अगर तुमसे तुम्हारा दिल 
किसी दिन रूठ जाये तो 
ठहर जाना, समझ लेना 
कि अब वापिस पलटने का 
अमल आग़ाज़ होता है

कभी अनहोनियों का डर 
परिंदों को उड़ाये तो 
हवा जब पेड़ से एक ज़र्द सा पत्ता गिराए तो 
ठहर जाना, समझ लेना कि 
अब वापिस पलटने का अमल आगाज़ होता है 
                                     -अनजान 
                                  प्रस्तुति : लोरी अली   

7 टिप्‍पणियां:

  1. काफी उम्दा रचना....बधाई...
    नयी रचना
    "एक नज़रिया"
    आपको नव वर्ष की ढेरो-ढेरो शुभकामनाएँ...!!
    आभार

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  2. बहुत सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .नव वर्ष २०१४ की हार्दिक शुभकामनाएं

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  3. बहुत खूब .. वापस लौटने का एहसास रखना जरूरी है ...

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  4. कभी तन्हाइयों का दर्द
    आँखों में समाये तो
    कोई लम्हा गुज़िश्ता चाहतों का
    जब सताये तो
    lillah! dil hai ti dhadakne ka bahaanaa koi dhudhe
    patthr ki tarah behis o bejaan sa kyu hai...

    उत्तर देंहटाएं

शुक्रिया, साथ बना रहे …।