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शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

यूं देखती है जैसे नहीं देखती नज़र
ज़ालिम के देखने का अंदाज़ देखिये....

शनिवार, 21 जनवरी 2012

तुम मुझको गुडिया कहते हो



तुम मुझको गुडिया कहते हो
सच कहते हो
खेलने वाले सब हाथों को
गुडिया ही तो लगती हूँ मै
जो पहना दो, मुझ पे सजेगा
मेरा कोई रंग नहीं
जिस बच्चे के हाथ थमा दो
मेरी किसी से जंग नहीं
कूक भरो
बीनाई लेलो
या मेरी गोयाईं ले ले लो
मांग भरो
सिदूर सजाओ
प्यार करो आँखों में बसाओ
और जब दिल भर जाये तो
दिल से उठा कर ताक़ पर रख दो
तुम मुझको गुडिया कहते हो
सच ही तो कहते हो
- परवीन शाकिर.

शनिवार, 26 नवंबर 2011



"ज़िंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी
मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जायेगी ......."

सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

आखिरी हिचकी...

आखिरी हिचकी तेरे जानु पे' आये
मौत भी मै शायराना चाहता हू ....
आन्सुओ से भीगी विदा.......

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

ख़ुदा हाफिज़






मरहबा मरहबा , खुदा हाफिज़
ऐ वफ़ा आशना ख़ुदा हाफिज़

कोई उनका ख़ुलूस तो देखे
क़त्ल करके कहा ख़ुदा हाफ़िज़

अच्छा अब फिर मिलेंगे ऐ नासेह!
उनका घर आ गया ख़ुदा हाफिज़

जाने क्योँ आज साज़े-हस्ती से
आ रही है सदा ख़ुदा हाफिज़

वक्ते- आखिर वो मुझसे यूँ बोले
आज से आपका ख़ुदा हाफिज़

बैठे बैठे हयात ने अख्तर
दफ'अतन ये कहा ख़ुदा हाफिज़
- अख्तर ग्वालियरी

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

तुम्हारे लिए....!



मैंने मासूम बहारों में तुझे देखा है
मैंने मोहूम इशारों में तुझे देखा है
मेरे महबूब! तेरी पर्दानशीं की कसम
मैंने अश्कों कि कतारों में तुझे देखा है.....
-साहिर लुधियानवी

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

नारी






पहले नर था
और उसकी नारी थी
अब नारी है
और उसका नारा है!!!